Russian Embassy Address, Phone number, Location, Consular assistance number, Opening hours, Email in New Delhi, India
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I had met Mr Barannikov, then, perhaps, Cultural Secretary, at Patna in January, 1976 when I had interviewed him also. I am a retired Professor of English now living in Lucknow. My father Acharya Shivapoojan Sahay, a well-known Hindi litterateur in Patna (Bihar) had been in correspondence with him on issues related to Hindi. I want some writings of my father translated into Russian. I have edited his complete writings in ten volumes – ‘Shivapoojan Sahay Sahitya Samagra, (published by Anamika Publishers, Delhi: Ph. 011-23281655/ 9773508632) and a single volume of his selected writings ‘Shivapoojan Sahaya: Rachna Sanchayan’ (pub. by Sahitya Akademi Delhi: 011-23386626/27/28). I can send a copy of the latter (Sanchayan) if my proposal for translation of his writings is accepted.
I would request for a response to my proposal.
Dr BSM Murty
7752922938 / 7985017549 / Email : bsmmurty@gmail.com My blog : vibhutimurty.blogspot.com
रुको ! रुको !! रुको !!! 14-02-2022
युद्ध रोको
परम प्रिय ,
श्री पुतिन जी, श्री बाइडन जी, श्री जिनपिंग जी और अन्य राष्ट्रों के अध्यक्ष महोदयों
आप लोग सभी युद्ध कर लीजिए और साधारण नहीं परमाणु युद्ध कीजिए । जी भरकर परमाणु बम फोड़िए ताकि कोई इच्छा अधूरी न रह जाये !! उसके बाद देखेंगे कौन शक्तिशाली है। कौन बड़ा है। इसीलिए ही तो परमाणु बम बनाये हैं कोई प्रदर्शनी के लिए थोड़ी हैं !!! तो करिये युद्ध प्रदर्शन !!!!!!
युद्ध के बाद ये देखना न भूलिये कि कितने सैनिकों के चिथड़े उड़े, कितने बच्चों , कितने वृद्धों , कितनी औरतों, पशुओं और पक्षियों के रक्त से नदियाँ लाल हो गईं । ये भी देखना न भूलिये कि माँस के लोथड़ों से पटा पड़ा है संसार कैसा लग रहा है । ये भी देखना न भूलिए कि दुनिया की सारी संपत्ति के मालिक आप हो गए , सारी शक्ति के आप मालिक हो गये। कितनी खुशी का पल होगा वह ! बस आप ही आप होंगे और कोई नहीं ! न आदमी , न पशु और न पक्षी । आप और आपके बचे बम !!!!
क्या आप यही चाहते हैं ?
नहीं ! आपलोग यह नहीं चाहते । आप समझदार लोग हैं । आप जानते हैं कि युद्ध में आप का भी वही हाल होगा जो वाकि सभी का । परमाणु बम किसी को नहीं पहचानता । कौन बचेगा इस महायुद्ध में – नेटो ! नाजी! रूस! अमरीका! चीन! या कोई और! – कोई नहीं ।
फिर युद्ध क्यों ?
यह धर्म और शांति का युद्ध नहीं है, बल्कि ॐ शांति शांति शांति का युद्ध है । यह युद्ध कुच्छ लोगों के अहम का है, झूठी शान का है, झूठे राष्ट्रवाद का है, नासमझी का है , अमानवीयता का है, घमंड का है, असंवेदनशीलता का है और सबके विनाश का है। यह good-good का नहीं bad-bad का युद्ध है। यही सनकीपन चला आया है सदियों से आज तक । पहले वाले युद्धों को तो दुनिया झेल गई , पर इस बार तो महाप्रलय की बारी है । हम मानव बन ही न पाये आज तक, हिंसक पशु ही रह गये। अच्छा ही होगा सब मिट जाये, हम लोग है ही नहीं इस दुनिया में रहने के लायक ।
आप मानवता, धर्म, न्याय और दया को समझ ही नहीं पाये, इसी का परिणाम है ये महायुद्ध के बादल । ये चारों ईश्वरीय गुण हैं। पशु कैसे धारण कर सकता है इन्हें ?
शायद ! दिल में तो आप भी चाह रहे होंगे कि युद्ध न हो ; पर अक्ल काम नहीं कर रही होगी कि अब पीछे कैसे हटें । बहुत सामान्य है यह – बस अपना चेहरा एक बार दर्पण में देख लीजिए और उस पर की झुर्रियों को गिन लीजिए । पूरी उम्र का अनुभव है इनमें । मुझे विश्वास है कि पूरी जिंदगी के अनुभवों ने बहुत कुच्छ अच्छा ही सिखाया होगा , कम से कम यह मूर्खता करने का ज्ञान तो नहीं सिखाया होगा कि मरते – मरते सभी को मार के मरो और अपने मुहँ पर अपमान की कालिख पुतवालो और अपनी जिद्द और झूठी प्रतिष्ठा को मानवता से ऊपर रखो ।
दुनियावालों ने आप लोगों को दुनिया की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी है , उसे नष्ट करने की नहीं । माँ पृथ्वी को मत उजाड़ो । बहुत सुंदर है यह दुनिया । इसे और सुंदर बना सको तो बनाओ, तुम्हें शक्ति मिली है, मौका मिल है । ऐसा न कर सको तो कम से कम इसका रूप तो मत बिगाड़ो !! इसका विनाश तो न करो । आप लोगों से अच्छा तो हमारे स्कूल माली है, जो पौधों को प्यार से सींचता है, उनपर फूल और फल उगाता है । पृथ्वी माँ के साथ – साथ स्कूल के बच्चों को आनंदित कर खुद फूला नहीं समाता ।
किसी एक देश के दुष्ट तानाशाह ने एक वायरस covid-19 को फैला कर दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जान ले ली, यह भी एक क्रूरता भरा युद्ध ही था मानवता के खिलाफ । जिसकी थोड़ी सी भी शर्म उसे नहीं थी, बस चेहरे पर एक वेशर्मी की अशोभनीय मुस्कान थी ।
इस वायरस ने 4 जून 2021 को मेरी पत्नी को छीन लिया और 9 जून 2021 को मेरे पिता जी को । मेरा हँसता खेलता परिवार बिखर गया, इस पीड़ा को झेलना कितना कठिन है इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है । मेरे जैसे कितने लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है बस वही जानते हैं । जीवन कितना मुश्किल और अर्थहीन हो गया है ।
इस युद्ध को भड़का कर आप लोग वही भूल फिर से करने जा रहे हैं । करोड़ों को बेसहारा बना कर उनका जीवन मुश्किल और अर्थहीन बनाने जा रहे हैं । इनमें आपके अपने देश के लोग भी होंगे केवल दुश्मन देश के ही नहीं । पर आपलोग तो उन्हें मशीन ही समझ रहे हैं हृदयहीन और संवेदनहीन।
आपके पास कितने भी परमाणु बम क्यों न हो पर विनाश के लिए तो एक ही बहुत है, कोई छोटा सा देश भी आपका बहुत बड़ा नुकसान कर सकता है। अपने इन खिलौनों को बस प्रदर्शन के लिए रखो, इसका उपयोग भूल से भी न करो।
जिस दिन जनता ने समझ लिया कि दो-चार सिरफिरे लोग पृथ्वी माँ के विनाश और मानवता के विनाश का कारण बन रहे हैं तो उनका विनाश करने में देर न करेगी। अगर जनता आप लोगों के विरोध में सड़कों पर निकल आई तो पाँच फुट जमीन भी न मिल पायेगी । आप लोग आँखों के तारे बने रहना चाहते हैं तो मानवीयता से सुशासन का सृजन करते रहो ।
युद्ध हुआ तो आपके कई बिलियन डालर खर्च होंगें । इसलिए युद्ध रोक दीजिए। इस बचत में से कुच्छ बिलियन डालर मुझे दे दीजिए जिससे मैं अपने प्रियजनों की याद में एक “विश्व शांति केंद्र “ की स्थापना कर सकूँ, जहाँ आपलोगों के साथ-साथ कई मिलियन लोग शांति और मानवता का पाठ सीख सकें। पर ये आप लोगों से नहीं होगा । हाँ ! विनाश के लिए हजारों बिलियन डालर भी कम होंगे।
मेरा एक छोटा सा पाठ :
1. “शक्ति की सत्ता” की स्थापना करने से अधिक महत्त्व आज “मानवता की सत्ता” की स्थापना का है। आपके देश की भौगोलिक सीमायें कहीं भी और कितनी ही सीमित क्यों न हों पर आपके देश की मानवता की सीमायें संसार के एक छोर से दूसरे छोर तक हों । इसी में सभी का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल है। आने वाले समय में एक ऐसी विश्व-व्यवस्था जन्म लेगी जिसमें भौगोलिक सीमायें बस औपचारिक होंगी ।
2. किसी भी प्रकार के युद्ध की संभावनाओं को दुनिया से खत्म करने की आवश्यकता है। इसी में सम्पूर्ण मानव समाज की उन्नति का सूत्र और आधार है ।
3. प्राकृतिक संसाधनों का सुनियोजित उपयोग करें और दुरुपयोग को रोकें जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी लंबे समय तक उनका उपयोग करके खुश रहें। यही समृद्धि की राह है ।
4. धर्मों के संघर्षों को खत्म करना होगा। वास्तव में तो जो ईश्वरीय धर्म हैं वे एक ही हैं उनके स्वरूप और सिद्धांतों में कोई अंतर नहीं है । इन धर्मों में कोई विकार होता ही नहीं है। सारे ब्रह्मांड की कृति तो एक ही शक्ति की है । इसलिए धर्म भी तो एक ही होगा । हाँ! इन धर्मों में विकारों का सृजन मनुष्यों की कृति है और उनका मूल रूप छिप गया है । इसलिए धर्म आज संघर्षों का विषय बन गया है। जिसे दूर करना जरूरी है जिससे होने वाले अनावश्यक खूनी संघर्षों को रोका जा सके । युद्धों की भूमिका भी कहीं न कहीं इन्हीं विकारी धर्मों की छाया में ही पनपती है।
5. दया जीवन में सद्भावना जगाती है इसलिए दया धर्म का आधार है । दया किसी भी प्रकार के भेद को स्वीकार नहीं करती । दया ही मन में धर्म की स्थापना करती है । जब मन धर्म को धारण कर लेता है तभी सम्पूर्ण समाज के लिए वह कल्याणकारी बन जाता है और हम मानव बन जाते हैं ।
6. न्याय संसार में सुव्यवस्था और शांति का आधार है । न्याय तभी कर सकते हैं जब हम मानव हों । मन में दया हो और धर्म को धारण किया हो।
इस भयानक स्थिति का निर्माण भी आप ही ने किया है और इसका समाधान भी आप ही निकालेंगे । मुझे विश्वास है आप मानव हैं और मानवता का पाठ सभी को सिखाएं ।
काश ! मैं आप लोगों से मिल पाता ।
एक सामान्य विश्व नागरिक
अमरसिंह भैसारे
स-12 , ओमशान्ति कॉम्प्लेक्स
सूस रोड , पाषाण , पुणे – 411021
महाराष्ट्र
भारत
मोबाईल न – +91 9860991716